बालाघाट: अगर देखा जाये तो आमतौर पर गर्भावस्था की अवधि नौ महीने होती है, लेकिन बालाघाट जिले में स्तिथ वारासिवनी से एक बहुत ही चौकाने वाली खबर सामने आयी जहा एक महीने पिछले 11 महीने से गर्भावस्था में है, जिसके बाद चिकित्स्कों ने अस्पताल में महिला का सर्जरी के माध्यम से सुरक्षित प्रसव कराया, जिससे मां और नवजात दोनों ही स्वस्थ हैं।
जांच के दौरान हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज पांडे के अनुसार, 28 वर्षीय पूर्णिमा गेडाम, जो वारासिवनी के वार्ड नंबर 04 की निवासी हैं, वह जाँच करने के लिए पास ही के सिविल अस्पताल में 6 फरवरी को पहुंची थी, जिसके बाद जब महिला की जांच हुयी तो रिपोर्ट के मुताबिक उनकी गर्भावस्था 11 महीने निकली। साथ ही महिला को अब तक कोई प्रसव पीड़ा भी शुरू नहीं हुयी थी।
गर्भावस्था में जटिलताएं और संभावित जोखिम
साथ ही में ये पता चला है की पूर्णिमा गेडाम का यह चौथा बच्चा था और महिला को पहले से मल्टीग्रेविडा, पोस्टडेटेड तथा पॉलिहाइड्रेमनियोस जैसी चिकित्सकीय स्थितियों से भी पीड़ित थीं। साथ ही, साथ ही, वह कुष्ठ रोग से भी पीड़ित थीं, जिससे उनकी डिलीवरी और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई थी।
इसे भी पढ़े:
- जबलपुर हादसा: महाकुंभ से लौट रही ट्रैवलर की ट्रक से टक्कर, भीषण दुर्घटना में 7 की मौत
- लाड़ली बहना योजना: 1.27 करोड़ बहनों के लिए खुशखबरी, 21वीं किस्त जारी, मार्च में आएगी अगली किश्त
नसबंदी के बावजूद गर्भधारण, बनी बड़ी चुनौती
डॉक्टर पांडे ने ये भी बताये की पूर्णिमा गेडाम की पूर्व में नसबंदी हो चुकी थी इसके बाद भी वह गर्भवती हुयी ये स्तिथि न की उनके लिए बल्कि चिकित्सा विज्ञानं के लिए भी असामान्य है। इसके बाद उनको जिला अस्पताल में रेफर कर दिया गया लेकिन उन्होंने वारासिवनी में स्तिथ अस्पताल में ही अपना इलाज करवाने की इच्छा जारी की।
टीम व डॉक्टरों की मेहनत से सफल सर्जरी
सिविल अस्पताल वारासिवनी में बीएमओ डॉ. कमलेश झोडे के मार्गदर्शन में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपम प्रिया राय, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सोनाली रावतकर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बी. चौधरी, डॉ. सत्यम शर्मा और उनकी टीम ने इस उच्च जोखिम वाली डिलीवरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जिसके फलस्वरूप महिला ने स्वास्थ्य बच्चे को जन्म दिया और वर्तमान में माँ और बच्चे दोनों ही सुरक्षित है।
डिलीवरी से चिकित्सा क्षेत्र को मिला अनुभव
इस दुर्लभ और जटिल मामले में सिविल अस्पताल वारासिवनी ने सफल डिलीवरी कर न केवल माँ को सुरक्षित मातृत्व प्रदान किया बल्कि उन्होंने अपने सफल प्रयाश के माध्यम से चिकित्सा जगत में एक नया अनुभव जोड़ा। जिससे भविष्य में अगर ऐसी कोई घटना घटित होती है तो ऐसी जटिल परिस्थितियों से निपटने में सहायता मिलेगी।